ऐ मेरे वतन के नौजवानों !

ऐ मेरे वतन के नौजवानों !

 

ऐ मेरे वतन के नौजवानों,

फ़र्क मिटा दो सब एक ही दिन के लिए,

 

ना कहो किसी को हिन्दू ना बनें कोई मुसलमां,

एक ही जात हो, धर्म हो सब का एक जैसा,

 

आओ मिटा दो हर फासला फहरा के रंग ये तीन

गेरूआ, सफेद, हरा मिल के बन जाए वतन एक

 

ये दिन ना भाए जो, तो लौट जाना अपनी मर्ज़ी को,

जो भा जाए तो, इस एक दिन की तरह काट देना ज़िन्दगी यूँही.

 

मेरे वतन

मेरे वतन

तू और जिये

तू और जिये, मुझमें, तुझमें, हम सब में जिये,

 

उम्र के साथ बढ़ें खुशियाँ यूँही,

फख्र से ऊंचा रहे तिरंगा यूँही.

 

Ayman Jamal

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