ब्लू वेल: एक ऑनलाइन जान लेवा गेम

ब्लू वेल: एक ऑनलाइन जान लेवा गेम

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By Ayman Jamal

 

29 जुलाई ऐसा दिन जब मुम्बई में एक 14 साल के लड़के नें एक बिल्डिंग की 7 वीं मंज़िल से कूद कर अपनी जान दे दी थी. तभी से सब के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आख़िर ऐसा क्या है इस गेम में जिसे खेलने के बाद लोग खुद की ही जान ले लेते हैं.

‘ब्लू वेल’ एक ऐसा ऑनलाइन गेम है जिसमें खेलने वाले को एक एडमिनिस्ट्रेटर मिलता है जो 50 दिनों तक टास्क देता है. यह टास्क बहुत डेरिंग होते हैं, जैसे- भरी सड़क के बीच दौड़ना, पूरे दिन कुछ न बोलना आदि. एक तस्वीर की मदद से टास्क के पूरे होने का सबूत दिया जाता है. पचास दिन बाद एडमिनिस्ट्रेटर, खेलने वाले को सुसाइड का टास्क देता है और ऐसा करने से मना करने पर ब्लैकमेल भी किया जाता है.

फिलिप बुदेइकिंन जिनको इस गेम का जन्मदाता माना जाता है, उन्होंनें कहा कि इस गेम के ज़रिए वह ‘बायोलॉजिकल वेस्ट’ साफ कर रहे हैं. मतलब यह कि जो इस खेल की लत में पड़ जाते हैं, उनको वैसे भी जीने का हक़ नहीं है. वह लोग कमज़ोर और नासमझ होते हैं.

‘ब्लू वेल’ के इस मुद्दे से जो बात सामने निकल कर आती है, वो यह है कि आज हमारे किशोर और युवाओं की स्थिति कितनी चिंताजनक हो गई है. टेक्नोलॉजी के इस ज़माने में पारंपरिक व्यवस्थाएं टूट रही हैं, परिवारों में दरारें आ रही हैं, यहां तक कि बच्चों की परवरिश में भी बदलाव आ रहा है. हमारे किशोर अपनी बढ़ती उम्र के साथ-साथ भटकते जा रहे हैं.

आज का किशोर विपरीत भावनाओं में जूझता हुआ व्याकुलता से भरा हुआ है. इस फेसबुक और ट्विटर के ज़माने में एक होड़ सी लगी है, ऑनलाइन के ज़रिए अपनी ज़िंदगी को खूबसूरत और सफल दिखाने की. सोशल मीडिया पर हर तरफ दिखावे का नज़ारा देख-देख कर हमारे युवाओं का एक तबका तुलना और डिप्रेशन का शिकार हो रहा है. तो कहीं आम सी ज़िन्दगी से बोर हो रहे किशोरों में चरम पर जा कर किसी भावना को आज़माने का चस्का नुकसान पहुंचा रहा है.

ऐसे में ‘ब्लू वेल’ जैसे गेम बहुत आसानी से उन किशोरों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं, जो अपनी ज़िंदगी को दूसरों से तुलना करके देखते हैं और खुद को कमज़ोर और नाख़ुश समझते हैं.

आज परिवारों और शिक्षकों को वक़्त के हिसाब से नए अंदाज में अपने किशोरों के साथ समन्वय और संबंध बनाए रखने की ज़रूरत है. बच्चों को वक़्त देना, उनके टैलेंट को बढ़ावा देना, बाजार मानसिकता को एक हद तक रोक देना, प्रतियोगिता की भावना को अच्छे ढंग से और एक दायरे तक ही सीमित रखना, सोशल मीडिया की वर्चुअलिटी को समझाना, जीवन का मोल बताना और आत्मविश्वास और आदर करने का जज़्बा भरना. यह सब एक परिवार, शिक्षक और समाज की ज़िम्मेदारी है.

आज अगर हमारे बच्चे और किशोर जीवन से हार रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि एक परिवार, शिक्षक और समाज के तौर पर हम सब हार रहे हैं. ज़रूरत है इस हार को जीत में बदलने की, अपने किशोरों में आत्मविश्वास भरने की और उनकी ज़िन्दगी को नई राह देने की.

आइए आज हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम अपने किशोरों को तनाव से मुक्ति दिलाने का प्रयास करते रहेंगे और एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जहां हमारे किशोर और युवा अपनी पूर्ण योग्यता का विकास कर सकें और आत्मविश्वास के साथ जी सकें.

Ayman Jamal

 

 

 

 

 

What is Blue Whale challenge ?

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